Entertainment रीमा का जाना एक युग का अंत होने जैसा…

रीमा का जाना एक युग का अंत होने जैसा…

रीमा लागू

वो भले ही किसी की सगी माँ नहीं थी, लेकिन उसके जाने से जैसे ममता का अहसास थम गया। हम बात कर रहे हैं एक ऐसी नामचिन शख्सियत की जिसने एक दर्शक समुह के मन: पटल पर नए जमाने की माँ के रुप में ममता की एक अमिट छाप छोड़ी है। हिन्दी सिने जगत की स्टार माँ रीमा लागू खामोशी से इस जहाँ से हमेशा-हमेशा के लिए रुखस्त हो गईं। 1979 में मराठी फिल्म सिंहासन से अपनी कैरियर की शुरुआत करने वाली रीमा ने 1988 में हिन्दी फिल्म कयामत से कयामत तक में काम किया और पूरे कैरियर में उन्होंने हिन्दी और मराठी की कई फिल्मों में जीवंत किरदार निभाया। हिन्दी की सुपरहिट फिल्म दिलवाले, कुछ कुछ होता है, हथियार , कल हो ना हो और हम आपके हैं कौन जैसी फिल्मों में मां की उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी।

रीमा ने केवल सिनेमा के पर्दे पर ही बेहतरीन रोल नहीं निभाया बल्कि वास्तविक जीवन के रंगमंच पर भी 58 वर्षों तक उन्होंने जो किरदार निभाए वो काबिल-ए-तारीफ हैं। 1958 में महाराष्ट्र में जन्मी रीमा ने 1979 में पहली बार फिल्मी दुनिया में कदम रखा। एक मराठी फिल्म के दौरान उनकी मुलाकात पॉपुलर मराठी एक्टर विवेक लागू से हुई। कुछ वर्षों बाद रीमा और विवेक विवाह के बंधन में बंध गए। रीमा की बेटी का नाम मृण्मयी लागू है। मृण्मयी के जन्म के बाद कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन जल्द ही रीमा और विवेक के बीच मनमुटाव पैदा हो गया और दोनों एक दूसरे से अलग हो गए।

विवेक लागू से अलग होने के बाद रीमा ने फिर कभी शादी नहीं की और एक सिंगल मदर के तौर अपनी बेटी को पाला। खुद को और अपनी बेटी को संवारने के लिए रीमा लागू ने जी-तोड़ मेहनत की। एक सिंगल मदर के तौर पर रीमा लागू का जीवन दूसरों के लिए मिसाल से कम नहीं। यकीनन रीमा का यूं हम सब को छोड़ कर जाना एक युग के अंत होने जैसा लगता है…!!!

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