Mukh Samachar सबकी आंखों नम कर अपने आखिरी सफर पर निकले मेजर चित्रेश बिष्ट

सबकी आंखों नम कर अपने आखिरी सफर पर निकले मेजर चित्रेश बिष्ट

 'कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।' यह गाना आपने कई बार टीवी पर या लाइव भी सुना होगा। लेकिन कभी इस गाने के शब्दों को दिल से महसूस किया है।

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नई दिल्ली। ‘कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।’ यह गाना आपने कई बार टीवी पर या लाइव भी सुना होगा। लेकिन कभी इस गाने के शब्दों को दिल से महसूस किया है। यह सिर्फ गाना नहीं बल्कि उन शहीदों के बलिदान की कहानी है, जो हमारे देश को सुरक्षित रखने के लिए लड़ते-लड़ते अपनी जान गवाह देते हैं। आजकल यही देशभक्ति गीत सुनाई दे रहे हैं। हर कोई पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शहादत को याद करके देशभक्ति गीत गा रहा है।

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चित्रेश बिष्ट की शहादत

पुलवामा में जिस तरह आतंकी हमला हुआ उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इश हमले के बाद हर कोई आक्रोश में है, और एक ही बात बार-बार दोहरा रहा है, पाकिस्तान से बदला। पाकिस्तान से बदला चाहिए, पूरी तरह से खत्म चाहिए पाकिस्तान। वहीं एक परिवार ऐसा है जो अपने वीर बेटे की शहादत को याद कर रहा है। उसके जज्बे को याद कर रहा है। रो भी रहा है और यह भी कह रहा है कि, हमें अपने लाल पर नाज है। हमें गर्व है कि हमारा बेटा भारत मां के लिए शहीद हुआ।

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IED बम को ड‍िफ्यूज करते हुए शहीद हुए चित्रेश बिष्ट

हम बात कर रहे हैं चित्रेश बिष्ट कि, जो IED बम को ड‍िफ्यूज करते हुए शहीद हो गए। जैसे ही उनकी शहादत की खबर उनके घर पहुंची हर तरफ सन्नाटा पसर गया। हर कोई एक ही बात बोल रहा था कि, 7 मार्च को शादी, अब क्या। किसी के पास कोई शब्द ही नहीं थे, जिसे देखो वो बस शांत था और अपने गम को आंसू से झलका रहा था।

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पार्थिव शरीर से लिपटकर काफी देर तक बिलखते रहे पिता

पिता एसएस बिष्ट बेटे मेजर चित्रेश के पार्थिव शरीर के ताबूत से लिपटकर काफी देर तक बिलखते रहे। रिश्तेदारों की तरफ इशारा करते हुए बोले, लो निकल गई बेटे की बारात। शादी की बारात तो नहीं निकली, लेकिन शहादत की बारात जरूर निकल गई। मां रेखा और बड़ा भाई नीरज भी छोटे भाई चित्रेश को याद कर तड़पते रहे।

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साथी की अंतिम विदाई पर फफक पड़े सैन्य अधिकारी

शहीद मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में सैन्य अफसर काफी संख्या में शामिल हुए। इनमें मेजर डीसी रमोला, गौरव तिवारी, अक्षय अरोरा, विपुल कोटनाला आदि मेजर चित्रेश के साथ रहे हैं। अंतिम यात्रा शुरू हुई तो यह सैन्य अधिकारी भी चित्रेश को याद कर रोने लगे।

भले ही यह जवान हमारे बीच नहीं रहे लेकिन इनकी शहादत को हम हमेशा नमन करेंगे।

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