• गौरी लंकेश

    पत्रकारिता की ‘गोली’, दाभोलकर, पानसरे, राजदेव, रामचंद्र और अब गौरी

    अगर अभी भी आंखें नहीं खुलीं तो अंधे बनने का नाटक बंद करो...!!! अगर कुछ लिखने में डर लगता है तो पत्रकार होने का दंभ ना भरो...!!! गौरी जो कह कर गई है अगर उसे अनसुना कर रहे हो, तो बहरे होने का नाटक बंद आगे पढ़ें

  • शिक्षक दिवस

    शिक्षक दिवस पर विशेष: गुरु रत्न धन पायो…

    सत् - सत् नमन है उन गुरुओं को जिनके मार्गदर्शन ने हमे संसार को देखने का नजरिया दिया और लाखों-करोड़ों की इस भीड़ में खुद को पहचानने की अनमोल शिक्षा दी। यूं तो गुरु जी के अनंत उपकारों का वर्णन शब्दों का कोई भी भंडार आगे पढ़ें

  • मुश्किल में किसान

    बिहार : बाढ़ और सूखाड़! उफ…यह दोहरी मार

    इस साल बिहार की बाढ़ ने साल 2007 की त्रासदी की तस्वीरों को जिंदा कर दिया है। उस वक्त सबने देखा था कि बाढ़ की विनाशलीला में कैसे लाखों की आबादी दाने-दाने का मोहताज हो गई थी...?इस 10 साल बाद भी तस्वीरें कुछ खास नहीं आगे पढ़ें

  • बिहार कांग्रेस में टूट के आसार, कई नेता छोड़ सकते हैं हाथ का साथ !

    ये राजनीति है कई बार इसकी दिशा और दशा हमारी सोच और आकलन से परे होती है। बिहार के राजनीतिक पटल पर घटित  पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर गौर करें तो जो चित्र बनती है वो कमोबेश यही कहती है।आगे और भी बहुत कुछ आगे पढ़ें

  • कोसी इलाके में नौनीहालों को लील रहा एड्स…उपाय नदारद!

    एड्स| जानकारी ही बचाव! एक लाइलाज और जानलेवा बीमारी जिससे अगर बच गए तो ठीक, लेकिन अगर इस बीमारी ने जकड़ लिया तो समझो मौत निश्चित! इतनी गंभीर बीमारी होने के बाद भी सरकारी स्तर पर इसके रोकथाम के कोई ठोस उपाय नहीं हैं| सबसे आगे पढ़ें

  • क्या प्रदेश बीजेपी में साइडलाइन हो रहे सुशील?

    बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व साल 2019 की लोकसभा की लड़ाई के लिए अभी से ही अपनी रणनीति बनाने में जुटा है| या यूं कहें कि तैयारी शीर्ष स्तर पर अभी से शुरु हो चुकी है| लेकिन बिहार की लड़ाई बड़ी ही दिलचस्प नजर आ रही आगे पढ़ें

  • क्यों भोथरी हो रही कश्मीर नीति की धार?

    साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली थी तो ये आशा थी कि इनके शासन काल में अनसुलझा कश्मीर मसला सुलझ जाएगा| इसके पीछे तर्क ये था कि इनकी भूमिका एक कठोर नीति निर्माता के तौर पर रही है| शपथ आगे पढ़ें

  • पॉलिटिक्स का चारा!

    नब्बे के दशक के में सामाजिक आंदोलन के प्रणेता लालू प्रसाद यादव सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से एक बार फिर मुश्किलों में हैं|दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस फैसले के बाद उनकी राजनीतिक जीवन का एक नया दौर फिर से शुरु हो गया आगे पढ़ें

  • आतंकिस्तान में आतंक पर मातम क्यों?

    पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में सूफ़ी संत लाल शाहबाज़ क़लंदर की दरगाह पर एक आत्मघाती बम धमाके ने जो मंजर दिखाया, उसका दुख तो सबके दिलों में है, लेकिन हैरानी नहीं। हैरानी इसलिए नहीं क्योंकि आतंकिस्तान की एक बड़ी पहचान तो आतंक ही है। आगे पढ़ें

  • 13 लाख की मूर्तियां बरामद

    रक्सौल- मोतिहारी में प्रशासन की सक्रियता रंग लाई है। कस्टम विभाग की टीम ने 13 लाख की रुपये मूल्य की मूर्तियां बरामद की है। पीतल की कुल 39 मूर्तियां बरामद की गई हैं। बताया जा रहा है कि नेपाल से आ रही एक इनोवा गाड़ी आगे पढ़ें