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बिहार: सीट बंटवारे को लेकर सस्पेंस जारी, बीजेपी से कुशवाह की बातचीत का नहीं निकला कोई हल

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नई दिल्ली। तेलंगाना, मिजोरम, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव की हलचल हर तरफ देखने को मिल रही है। वहीं कुछ ऐसी ही हलचल बिहार की राजनीती में भी देखाई दे रही है। हर कोई सीट बंटवारे को लेकर चिंतित दिखाई दे रहा है।

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सीटों पर उपेंद्र कुशवाहा का दावा

केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार बीजेपी के प्रभारी और पार्टी महासचिव से बिहार में सीट शेयरिंग पर बात की। सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा ने भूपेन्द्र यादव से कहा कि उनकी पार्टी को 2014 में गठबंधन में तीन सीटें मिली थीं जिन पर पार्टी को जीत मिली थी। उपेंद्र कुशवाहा ने ये भी कहा कि 2014 के बाद पिछले साढ़े चार सालों में उनकी पार्टी का जनाधार न सिर्फ बिहार में बढ़ा है बल्कि देश के अन्य कई राज्यों में भी उसका असर बढ़ा है। इसलिए वो 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए तीन सीटें चाहते हैं।

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बीजेपी का जवाब

वहीं भूपेंद्र यादव ने कहा कि बिहार में एनडीए में जेडीयू भी नए घटक दल के तौर पर जुड़ा है। ऐसे में सभी सहयोगियों को जेडीयू के लिए कुछ सीटों का नुक़सान उठाना पड़ेगा। मतलब साफ़ है कि सबको 2014 की तुलना में 2019 के लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा।

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इसके जवाब में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ये ठीक है अगर कोई नहीं नया घटक दल आता है तो सबको थोड़ा-थोड़ा नुक़सान होता है, लेकिन जब फ़ायदा होता है तो उसे सबको मिलना चाहिए। मगर जब बिहार में एनडीए को फायदा मिला तो उनकी पार्टी को इसका लाभ नहीं मिला। मतलब साफ है कि उपेंद्र कुशवाहा ने इशारों इशारों में कह दिया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में एनडीए की सरकार बनी तो बीजेपी और एलजेपी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, लेकिन उनकी पार्टी को बाहर रखा गया था।

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सूत्रों की मानें तो अब उपेंद्र कुशवाहा चाहते हैं कि बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद उनकी पार्टी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया, उसकी भरपाई लोकसभा चुनाव में उन्हें तीन सीटें देकर हो सकती है।

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