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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते…
छठा रूप कात्यायनी:

सुख, शान्ति एवम समृध्दि की मंगलमयी कामनाओं के साथ नवरात्र के महापर्व की शुरुआत हो चुकी है| नवरात्र को लेकर देश भर में लोगों में उत्साह है। इस महापर्व के छठे दिन मां के छठे रूप कात्यायनी की आराधना की जाती है। पुराणों के मुताबिक मां कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं।इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है।इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देता है।इनका साधक इस लोक में रहते हुए भी अलौकिक तेज से युक्त होता है।

पूजा की विधि  :

नौ दिन चलने वाले इस पर्व के छठे दिन मां की पूजा कात्यायनी के रुप में की जाती है।कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री हैं।कात्यायन ऋषि ने मां दुर्गा की पूजा की और वरदान मांगा कि देवी उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें।कात्यायन की पुत्री होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।रोग,शोक से मुक्ति के लिए मां कात्यायनी की अर्चना करें।

श्रद्धालुओं में उत्साह :

नवरात्र को लेकर राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में लोगों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के तमाम पूजा पंडाल सज-धज के तैयार हो गए है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दूर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है। मां के भक्त नवरात्र के नौ दिनों तक उपवास रख कर मां की आराधना करते है। ऐसा माना जाता है नौ दिन तक मां के अलग-अलग रुपों की पूजा – अर्चना करने से माता की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।

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